सूरत में 82 वर्षीय बुजुर्ग से ₹2.96 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर बनाया शिकार
सूरत: गुजरात के सूरत में साइबर अपराध का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक 82 वर्षीय बुजुर्ग से कथित तौर पर ₹2.96 करोड़ की ठगी की गई। साइबर ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी और कथित तौर पर उन्हें कई दिनों तक डिजिटल निगरानी में रखा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके नाम से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी बनकर किया संपर्क
आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिस अधिकारी और अन्य जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताया। पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
ठगों ने कथित तौर पर कहा कि यदि जांच में सहयोग नहीं किया गया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस डर के कारण पीड़ित ने आरोपियों के निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया।
कई किस्तों में रकम ट्रांसफर कराने का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित से कथित तौर पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। कुल मिलाकर लगभग ₹2.96 करोड़ की राशि ठगों के कब्जे में जाने की बात सामने आई है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाले ऐसे मामलों में साइबर अपराधी पीड़ित को पुलिस, CBI, ED, RBI या अदालत का अधिकारी बताकर डराते हैं और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
क्या है Digital Arrest Scam?
Digital Arrest कोई वास्तविक कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर लंबे समय तक “डिजिटल अरेस्ट” करके पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर नहीं करतीं।
साइबर अपराधी आमतौर पर पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का नाम लेकर पीड़ित को डराते हैं। इसके बाद बैंक खाते की जानकारी, OTP या पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में क्या करें?
अगर किसी अनजान व्यक्ति की ओर से पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल आए और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाए, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
- किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें।
- OTP, PIN, Password या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- वीडियो कॉल पर किसी अधिकारी की बात को केवल पहचान के आधार पर सही न मानें।
- कॉल काटकर संबंधित विभाग या स्थानीय पुलिस से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।
- साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।

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